जहांगीराबाद में 1 ही परिवार के 17 सदस्य संक्रमित

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे बड़े हॉटस्पॉट जहांगीराबाद में आज बुधवार को 1 ही परिवार के 17 सदस्य कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में अब तक 380 कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। वर्तमान में यहां 70 कोरोना संक्रमित मरीज इलाजरत हैं।वहीं दूसरी और भोपाल के सी 21 मॉल में संचालित 108 एंबुलेंस सर्विस के 13 और कर्मचारी कोरोना संक्रमित मिले। इसके साथ 108 एंबुलेंस सर्विस में काम करने वाले संक्रमित कर्मचारियों की संख्या 19 हो गई। दो दिन पहले भी 6 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव मिले थे। प्रियदर्शनी नगर में भी 8 की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है।मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज बुधवार को 78 नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं।

अनलॉक होते ही मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग भूले लोग

प्रदेश में अनलॉक- 1 में ढील दिए जाने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। प्रदेश में संक्रमित मरीजों की संख्या 10 हजार को पार कर गई है। भोपाल में आंकड़ा 2131 पर पहुंच गया है। राज्य में अब तक 427 मरीजों की मौत हो चुकी है। प्रदेश के जिलों में जिस तरह से संक्रमण फैल रहा है उससे हालत चिंताजनक होते जा रहे हैं। पूरे प्रदेश में बाजार खुलते ही भीड़ देखने को मिल रही है, इससे संक्रमण का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। यहां लोग बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के घूम रहे हैं। सरकार द्वारा मास्क नहीं पहनने पर जुर्माने वसलूने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन ये शहरों तक सीमित है। 9 जून से शुरू हुई 12वीं की परीक्षा में पहले दिन तो सोशल डिस्टेंसिंग देखने को मिली थी लेकिन दूसरे पेपर में परीक्षा केंद्रों पर नियमों का पालन कराने वाले शिक्षक गायब थे। कई केंद्रों से ऐसी तस्वीरे सामने आई हैं, जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया गया। परीक्षा खत्म होने के बाद छात्र भीड़ के रूप में स्कूलों से बाहर निकले।

बारिश में अच्छा खाना और सफाई ज़रूरी

बरसात के दिनों में स्वास्थ्य से लेकर रहन-सहन और खानपान में भी परिवर्तन और सतर्कता बेहद जरूरी है। विशेष तौर पर इस मौसम में डाइट का सही चयन आपकी सेहत को बरकरार रख सकता है। यह सही है कि बरसात का मौसम गर्मी से राहत प्रदान करता है, लेकिन इस मौसम में सजगता न बरतने पर विभिन्न प्रकार के संक्रमण, एलर्जी और खासकर पेट संबंधी समस्याएं हो जाती हैं। आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में प्रकृति अम्ल रस प्रधान रहती है और इस ऋतु में वात दोष का प्रकोप होता है, जबकि पित्त दोष एकत्रित होता है। शरीर में इस प्रकार की स्थिति पाचकाग्नि को कमजोर कर देती है और अनेक रोगों का कारण बन जाती है। ऐसे में खाने पीने में की गई लापरवाही जैसे-बासी भोजन, अधिक अम्लीय भोजन का सेवन, मिर्च मसाले एवं खट्टे पदार्थों का सेवन, गरिष्ठ भोजन रोगों को निमंत्रण देते है। ऐसे में बारिश के सीजन में खान-पान का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।

  • तैलीय और चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थों से भी परहेज करें। इससे आंतों से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं।
  • बारिश में शरीर में वात यानी वायु की वृद्धि होती है, इसलिए हल्के व शीघ्र पचने वाले वाले व्यंजनों का ही सेवन करना चाहिए।
  • कटे हुए फलों और कटी हुई सब्जियों से परहेज करें, क्योंकि इनसे शरीर में संक्रमण उत्पन्न होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • मौसमी फलों और सब्जियों को आहार में वरीयता दें।
  • शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र को सशक्त करने के लिए विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों को डाइट में वरीयता दें। जैसे नींबू और अन्य साइट्रस फल। ये फल विभिन्न प्रकार के संक्रमणों को रोकने में मददगार हैं।
  • पानी को दो मिनट उबाल लें फिर उसे ठंडा कर पीएं।

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कोरोना के चलते विराट-अनुष्का भी हुए घर में कैद, प्रशंसको को भी घर में हीं रहने की सलाह दी


कोरोना के प्रकोप से इन दिनों समूचा विश्व खौफजदा है। इस महामारी के खिलाफ एतियात बरतने के लिए एक ओर जहां हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए लोगों से भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से परहेज करने और वायरस के संक्रमण से बचने के लिए तमाम सावधानी बरतने की सलाह देते हुए रविवार 22 मार्च को देश की जनता से जनता कफ्र्यू का आवहान किया है। तो वही टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने शुक्रवार को सभी को अपनी सुरक्षा के लिए घर पर रहने के लिए कहा। विराट ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप साझा किया, जिसमें उन्होंने अनुष्का के साथ अपने फैंस से आवश्यक सावधानी बरतने के लिए कहा। अनुष्का ने कहा कि हम जानते हैं कि हम सभी बहुत कठिन समय से गुजर रहे हैं, और कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने का एकमात्र तरीका एक साथ घर में रहकर है। हम अपनी सुरक्षा के लिए और दूसरों के लिए भी घर पर रह रहे हैं और आपको भी इसे रोकने के लिए भी करना चाहिए। आइए हम इसे और सभी के लिए सेल्फ आइसोलेट के द्वारा सुरक्षित करें। घर पर रहें और स्वस्थ रहें। वहीं विराट कोहली ने पोस्ट को रीट्वीट किया और कहा कि समय की आवश्यकता को देखते हुए सरकार के निर्देशों का पूरी तरह से सम्मान और पालन करना है। घर पर रहें, सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें।
गौरतलब है कि कोरोना वायरस के कहर से दुनिया के ज्यादातर देश प्रभावित हुए हैं। चीन, इटली और ईरान जैसों देशों में इसके कारण बड़ी संख्या में लोगों को जान गंवानी पड़ी है। इसके खौफ के कारण दुनियाभर में लोगों की गतिविधियां सिमटकर रह गई है। बाजार, पर्यटन स्थल और अन्य स्थान सूने पड़े हैं और सरकार की समझाइश का पालन करते हुए लोग घर से बाहर निकलने से परहेज कर रहे हैं। खेल के आयोजनों पर भी कोरोना वायरस के कहर का असर पड़ा है।इस वायरस के कहर के चलते लोगों का या तो विभिन्न आयोजन कैंसल करने पड़े हैं या उन्हें स्थगित करना पड़ा है।

कहीं आप भी तो नहीं आ गए कोरोना वायरस की चपेट मे… यूं करे अपना बचाव…


चीन से फैले कोरोना वायरस ने देखते हीं देखते पूरी दुनिया में अपने पैर पसार दिए है। महामारी का रूप ले रहे इस वायरस की दहशत ने अब भारत में भी आमद दे दी है। भारत में भी अब तक 13 मरीजों के कोरोना से संक्रमित होने पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में लोग इस बात से परेशान हैं कि कहीं वे भी इस वायरस की जद में ना आ जाए। अगर आप भी इस वायरस को लेकर परेशान हैं तो बाकी सब छोड़कर ये जान लीजिए कि आखिर ये कैसे फैलता है और कैसे ये मिनटों में आपकों अपना शिकार बना लेता है। कोरोना वायरस से बचने के लिए अब तक किसी कारगर दवा का निर्माण नहीं हो पाया है ऐसे में बचाव ही सबसे कारगर उपाय है। कोरोना के खतरों को देखते हुए शोधकर्ताओं और डाॅक्टरों ने इससे बचाव के कुछ टिप्स बताएं है। इन टिप्स को अपनाकर आप इस वायरस से अपना बचाव कर सकते हैं…
कैसे फैलता है ये वायरस
इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति जब छींकता है और अगर आप उसके आसपास हैं तो ये आपकी आंखों, नाक या मुंह के माध्यम से सीधे शरीर में प्रवेश कर जाता है। आप तब प्रभावित नहीं होते जब आप संक्रमित व्यक्ति से 2 मीटर दूर हों। लेकिन अगर इससे पास हुए तो खतरे की जद में हैं। अगर आपके आसपास कोई ऐसा है जो छींक रहा हो तो उसे मास्क यूज करने को कहें। इससे बचने के लिए भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। क्योंकि वहां कौन कोरोनावायरस से पीड़ित है, आप नहीं जानते। कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित होता है पर उसमें लक्षण जल्दी नहीं उभरते। कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति की लार से ये भी फैलता है। यानी उसके प्रयोग किए गए बर्तन में या कप में आपने खाया-पीया तो आप भी संक्रमित हो जाएंगे।आप केवल फेस मास्क पहनकर इस वायरस से नहीं बच सकते। अगर आपके ऑफिस, घर, आसपड़ोस, यात्रा के दौरान किसी संक्रमित व्यक्ति द्वारा छुए गए दरवाजों, दरवाजों के हैंडल, पेन, कंप्यूटर, माउस, फोन, डिजिटल डिवाइस, टिश्यू पेपर, लिफ्ट बटन, सीढ़ियों के हैंडल को आप छू देते हैं तो ये उस जगह से आपके शरीर में प्रवेश कर जाएगा। यही नहीं, संक्रमित व्यक्ति ने किसी जगह को छुआ और आपने उस जगह को छूकर फिर अपने चेहरे, आंखें को छुआ तो आप तुरंत बीमार होंगे। इन्हीं हाथों से आपने अपने किसी परिवारजन को छू लिया तो वो भी संक्रमित हो जाएगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि संक्रमित व्यक्ति जिस चीज को छू देता है उस जगह पर ये वायरस अगले 48 घंटे तक जीवित रहता है। उस समय में जो-जो इसे छुएगा वो संक्रमित होता जाएगा।
बचाव के लिए ये उपाय अपनाएं
-नियमित अंतराल पर हाथों को धोते रहने से आप इस वायरस की चपेट में आने से बच सकते हैं। जब भी हाथ धोएं तो कम से कम 20 सेकेंड तक इन्हें साफ करें।
-हाथों को धोते हुए दोनों तरफ की सतह साफ करें। ऊंगलियों के बीच में, नाखूनों के नीचे की ओर साफ करें।
-अगर आपको कफ है तो उसे टिश्यू में डालकर डस्टबिन में डालें। एक दिन से ज्यादा एक मास्क को ना पहनें। अगर आप लंबे समय तक एक ही मास्क पहने रहते हैं तो इसमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं।
– बीमार व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचें। खासतौर पर उनके द्वारा प्रयोग किए गए पर्सनल चीजों, भोजन, बर्तन, कप, तौलिए को प्रयोग ना करें।
-लगातार अपनी आंखों, कान और नाक को छूने से बचें।
-जब भी आप बीमार हों तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। इसमें बिल्कुल देरी ना करें।

12 शिवरात्रियों में महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण महाशिवरात्रि पर जानें पूजा – अर्चना की विधि


ना आदि ना अंत है उसका , वो सबका है ना इसका – उसका ….. वहीं शून्य है – वहीं इकाय , जिस के भीतर बसा शिवाय ……
‘शिव की महान रात्रि’, महाशिवरात्रि का त्यौहार भारत के आध्यात्मिक उत्सवों की सूची में सबसे महत्वपूर्ण है। शिव भक्‍त अपने आराध्‍य भोले भंडारी की विशेष आराधना के लिए साल भर इस दिन की प्रतीक्षा करते हैं। मान्‍यता है कि महाशिवरात्रि के दिन जो भी भक्‍त सच्‍चे मन से शिविलंग का अभिषेक या जल चढ़ाते हैं , उन्‍हें महादेव की विशेष कृपा मिलती है। कहते हैं कि शिव इतने भोले हैं कि अगर कोई अनायास भी शिवलिंग की पूजा कर दे तो भी उसे शिव कृपा प्राप्‍त हो जाती है। यही कारण है कि भगवान शिव शंकर को भोलेनाथ कहा गया है। आइये जानते है कि इस बार किस तरह है महाशिवरात्रि मनाई जाएगी।
साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि को सिर्फ शिवरात्रि कहा जाता है. लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन आने वाले शिवरात्रि महाशिवरात्रि कहलाती है। महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है और यह भगवान शिव का भी प्रमुख पर्व माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग ( जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है ) उसके के उदय से हुआ था । इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ । इसलिए भी यह शिवरात्रि सबसे ख़ास है। वही ये भी मान्यता है कि ईशान संहिता के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन ज्यितिर्लिंग के रूप में शिव प्रकट हुए थे। इसलिए इस पर्व को महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं। कहते हैं कि महाशिवरात्रि के व्रत से जीवन में पाप और भाग का नाश होता है। इस दिन व्रत , उपवास , मंत्रजाप और रात्रि जागरण का विशेष महत्व होता है।
इस महापर्व से एक और कहानी जुड़ी है। समुद्र मंथन की। समुद्र मंथन अमर अमृत का उत्पादन करने के लिए निश्चित थी, लेकिन इसके साथ ही हलाहल नामक विष भी पैदा हुआ था। हलाहल विष में ब्रह्मांड को नष्ट करने की क्षमता थी और इसलिए केवल भगवान शिव इसे नष्ट कर सकते थे। भगवान शिव ने हलाहल नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था। जहर इतना शक्तिशाली था कि भगवान शिव बहुत दर्द से पीड़ित थे और उनका गला बहुत नीला हो गया था। इस कारण से भगवान शिव ‘नीलकंठ’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। उपचार के लिए, चिकित्सकों ने देवताओं को भगवान शिव को रात भर जागते रहने की सलाह दी। शिव का आनंद लेने और जागने के लिए, देवताओं ने अलग-अलग नृत्य और संगीत बजाने लगे। जैसे सुबह हुई, उनकी भक्ति से प्रसन्न भगवान शिव ने उन सभी को आशीर्वाद दिया। शिवरात्रि इस घटना का उत्सव है, जिससे शिव ने दुनिया को बचाया। तब से इस दिन, भक्त उपवास करते है।
इस अवसर पर भगवान शिव का अभिषेक अनेकों प्रकार से किया जाता है। भक्त सूर्योदय के समय पवित्र स्थानों पर स्नान करते हैं। यह शुद्धि के अनुष्ठान हैं, जो सभी हिंदू त्योहारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भक्त शिवलिंग की तीन या सात बार परिक्रमा करते हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि 21 फरवरी शुक्रवार को है। शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि पूजा में इन वस्तुओं को अवश्य शामिल करना चाहिए। जल , कच्चा दूध , शहद , दही , शक्कर , घी से शिव जी का अभिषेक किया जाता है । साथ ही विशेष तौर पर पूजन में सिंदूर , फल , धूप , दीप , भांग, मदार, धतूरा, चन्दन, रोली, मौली, चावल, कपूर, बेलपत्र, केसर, गंगाजल, जनेऊ, इत्र, कुमकुम, पुष्पमाला, शमी पत्र, भी शामिल करे। पूजन करते समय शिव एकादशाक्षरी मंत्र , शिव स्तुति मंत्र , शिव चालीसा का जप करते रहे। इस प्रकार भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते है और सभी मनोकामना पूर्ण होती है।
महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात है. साथ ही इस रात में आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती हैं. शास्त्रों में इस दिन ज्योतिष उपाय करने से जीवन में सभी प्रकार के तनाव खत्म होते हैं और सकारात्मक प्रमाण दिखने लगते हैं. वही इस दिन रुद्राभिषेक का भी बहुत बड़ा महत्व होता है. शिवलिंग पर रुद्रमंत्रों द्वारा अभिषेक किया जाता है . शंकर भगवान की पूजा करने की विधि बहुत ही सरल है लेकिन इसमें विशेष सावधानी बरतनी की जरूरत है. भोले शंकर भक्तों पर जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं, उतनी जल्दी ही एक छोटी सी गलती नाराज भी हो जाते है . शिवलिंग पर कौन सी चीजें नहीं चढ़ानी चाहिए इसका भी ध्यान रखा जाता है। शंख जल , तुलसी पत्ता , तिल , टूटे हुए चावल , नारियल पानी , केतकी का फूल , शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता है।
भारत में स्थापित बारह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के पवित्र धार्मिक स्थल और केंद्र हैं। वे स्वयम्भू के रूप में जाने जाते हैं, जिसका अर्थ है “स्वयं उत्पन्न”। बारह स्‍थानों पर बारह ज्‍योर्तिलिंग स्‍थापित हैं। मध्य भारत में शिव अनुयायियों की एक बड़ी संख्या है। महाकाल उज्जैन के अवंति नगर में स्थापित महाकालेश्वर शिवलिंग, जहां शिवजी ने दैत्यों का नाश किया था।महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन सबसे सम्माननीय भगवान शिव का मंदिर है। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि के लिए गुरुवार रात 2.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे और भस्मारती होगी। इसके बाद सुबह 4.30 बजे से दर्शन का सिलसिला शुरू होगा, जो 22 फरवरी को रात 10.30 बजे शयन आरती तक जारी रहेगा। इस दौरान 43 घंटे भक्तों के लिए राजाधिराज का दरबार खुला रहेगा। वहीं मंदिर के गर्भगृह में भगवान महाकाल की पूजा अर्चना क्रम चलता रहेगा।
शिवलिंग पर कौन सी चीजें नहीं चढ़ानी चाहिएमध्यप्रदेश में कैसा रहेगा महाशिवरात्रि का जश्न वहीं शून्य – वहीं इकाय , जिस के भीतर बसा शिवाय समुद्र मंथन की घटना का उत्सव महाशिवरात्रि महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात

ज्यादा उबासी आना भी है इन बीमारियों का संकेत इसलिए हो जाएं अलर्ट…


यूं तो उबासी का आना एक सामान्य बात है। और हम में से लगभग सभी को उबासी आती है। लेकिन कुछ लोगों को जरूरत से ज्यादा उबासियां आने लगती हैं। ऐसे में उनको लगता है कि हो सकता है अधिक थकान, नींद पूरी ना या किसी काम में अरुचि के कारण ऐसा हो रहा है। मगर ऐसा नही है उबासी का सीधा कनेक्शन हमारे स्वास्थ्य से होता है। कई बार सीरियस हैल्थ इशू के कारण ज्यादा उबासियां आने आती हैं पर हम इसे मामूली समझकर छोड़ देते हैं। यही छोटी सी लापरवाही आगे चलकर हमारे लिए खतरनाक साबित हो सकती है।  तो आइए जानते हैं वह कौन से सीरियस हैल्थ इशू हैं जिनके कारण ज्यादा उबासियां आती हैं।
लीवर खराब होने के अंदेशा- लीवर खराब होने की स्थिति में शरीर को बहुत ज्यादा थकावट होने लगती है। थकान महसूस होने पर उबासी आती है। जब भी आपको ज्यादा उबासी आने लगे तो अपने लीवर का चैकअप जरूर करवा लें।
दिल की बीमारियों के कारण- डॉक्टर्स का मानना है कि दिल और फेफड़ों की बीमारियों के कारण भी ज्यादा उबासियां आने लगती हैं। जब दिल और फेफड़े सही तरह से काम नहीं करते तो अस्थमा की समस्या होने लगती है। अगर समय रहते इनका इलाज ना करवाएं जाएं तो स्थिति और भी खराब हो सकती है।
ब्रेन ट्यूमर का खतरा- कुछ अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ब्रेन स्टेम जख्म की वजह से ज्यादा उबासियां आने लगती है। पिट्यूटरी ग्लेंड दब जाने के कारण उबासियां आती हैं।
बीपी और दिल की धड़कन का कम होना- तनाव के कारण बीपी बढ़ जाता है और दिल की धड़कन भी कम हो जाता है। ऐसा होने पर ऑक्सीजन ब्रेन तक नहीं पहुंच पाती। इस स्थिति में उबासी के जरिए शरीर में ऑक्सीजन पहुंचती है। अगर आपको भी जरूरत से ज्यादा उबासी आने लगे तो एक बार डॉक्टरी चैकअप जरूर करवा लें।    
ब्लड ग्लूकोस के स्तर में कमी- ज्यादा उबासी आना डायबिटिस्क में हाइपोग्लाइसीमिया का शुरूआती संकेत होता है। जब शरीर में ब्लड ग्लूकोस का स्तर कम हो जाता है तो उबासी आनी शुरू हो जाती है। अगर आप डायबिटीज के पेशेंट हैं और आपको ज्यादा उबासी आ रही है तो डॉक्टर के पास जरूर जाएं।
थाइरॉयडबार-बार उबासी आना हाईपोथाइरॉयड डिस्म की निशानी हो सकती है। शरीर में थाइरॉयड हॉर्मोन कम बनने पर ऐसा होता है।

खर्राटों से छुटकारा दिलाएंगें ये आसान घरेलू उपाय…


खर्राटों का आना वैसे तो एक आम समस्या है। और हम में से अधिकतर लोगों के साथ ये समस्या होती है। खर्राटे लेने वाले शख्स को भले ही कुछ भी पता न चले लेकिन जब उसके खर्राटे लेने की वजह से किसी दूसरे व्यक्ति की नींद में खलल पड़ता है या उसे परेशानी झेलनी पड़ती है तो ऐसे में अक्सर खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को बहुत शर्मसार होना पड़ता है। वैसे तो खर्राटे एक आम परेशानी है परन्तु हमें इसको सामान्य रूप में नहीं लेना चाहिए। कई बार यह समस्या गंभीर बीमारी में भी बदल सकती है। लेकिन क्या आप जानते है कि हम अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव और कुछ आसान घरेलू उपायों को अपनाकर काफी हद तक इस समस्या से निजात पा सकते है। आईए जानते हैं उन उपायों के बारे में…
पुदीने का तेल- पुदीने में कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो गले और नासाछिद्रों की सूजन को कम करने का काम करते हैं। इससे सांस लेना आसान हो जाता है। सोने से पहले पिपरमिंट ऑयल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर उससे गरारे कर लें। इस उपाय को कुछ दिन तक करते रहें। फर्क आपके सामने होगा।
अदरक और शहद की चाय- यह सबसे आम घरेलू वस्तु है  जो पेट की खराबी, वजन कम करने, दिल की समस्याओं से लेकर आम खांसी और जुकाम तक का इलाज कर सकता है। अदरक एक एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल एजेंट के रूप में कार्य करता है और खर्राटों से राहत देता है। खर्राटे की समस्या से छुटकारा पाने के लिए दिन में दो बार अदरक और शहद की चाय पीना बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।
हल्दी – हल्दी में एंटी-सेप्टकि और एंटी-बायोटिक गुण होते हैं. इसके इस्तेमाल से नासा-द्वार साफ हो जाता है जिससे सांस लेना आसान हो जाता है. रोज रात को सोने से पहले दूध में हल्दी पकाकर (हल्दी वाला दूध) पीने से फायदा होगा.
अनानास, केले और संतरे- खर्राटों से छुटकारा पाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप नींद की गुणवत्ता में सुधार करें और यह शरीर में उत्पादित मेलाटोनिन की मात्रा में वृद्धि करके प्राप्त किया जा सकता है. मेलाटोनिन एक हार्मोन है जो हमें नींद देता है और ऐसा करने का प्रभावी तरीका उन खाद्य पदार्थों को सेवन करना है जिनमें इसकी उच्च मात्रा होती है. अनानास, केले और संतरे में भरपूर मात्रा में मेलाटोनिन रहता है इसलिए इनका सेवन आपके खर्राटों को रोक सकता है। लहसुन- खर्राटे की समस्या में लहसुन का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। लहसुन में हीलिंग-क्वालिटी होती है ये ना सिर्फ ब्लॉकेज साफ करता है बल्कि हमारे श्वसन-तंत्र को भी बेहतर बनाता है। अच्छी और चैन की नींद के लिए लहसुन का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद है।
वजन कम करना- अधिक वजन वाले लोगों में खर्राटे लेने की अधिक संभावना होती है। गले और फैटी टिशू के आस-पास की मांसपेशियों का तनाव खर्राटों में योगदान कर सकता है। स्वस्थ आहार का सेवन करने के साथ-साथ नियमित रूप से व्यायाम करने से वजन कम करने और खर्राटों को रोकने में मदद मिल सकती है।