निर्भया को मिला इंसाफ….दरिंदों को फांसी


काफी लंबे समय से कानूून के साथ आंख-मिचैली और फांसी से बचने के लिए तरह- तरह के हथकंडे अपना रहे निर्भया के चारों गुनहगारों को पूरे 7 साल, 3 महीने, 4 दिन बाद अपने किए गुनाहों की सजा मिल गई है। 20 मार्च की सुबह चारों दरिंदों को फांसी दे दी गई है। सभी दोषियों ने आखिरी वक्त तक जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की दौड़ लगाई मगर उन्हें अखिरकार अपने किए की सजा मिल हीं गई। जेल प्रशासन सूत्रों के अनुसार चारों दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाया गया और इसके लिए जेल नंबर-3 की फांसी कोठी में दो तख्तों पर चारों को लटकाने के लिए चार हैंगर बनाए गए थे। इनमें से एक का लीवर मेरठ से आए जल्लाद पवन ने खींचा तथा दूसरे लीवर को जेल स्टाफ ने खींचा। जेल अधिकारियों ने बताया कि चारों दोषियों के शव करीब आधे घंटे तक फंदे पर झूलते रहे जो जेल नियमावली के अनुसार फांसी के बाद की अनिवार्य प्रक्रिया है। दक्षिण एशिया की सबसे बड़े जेल परिसर तिहाड़ जेल में पहली बार चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई है।
फांसी के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि आज वह बहुत खुशी महसूस कर रही हैं क्योंकि उनकी बेटी को आखिरकार इंसाफ मिल गया। उन्होंने कहा कि निर्भया की मां होने के नाते आज वह गर्व महसूस कर रही है। सात साल पहले जो घटना हुई उससे लोग और देश शर्मसार हुआ था लेकिन आज न्याय मिला है। निर्भया के पिता ने कहा कि देर से ही सही उनको न्याय मिला। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक पिता होने का कर्त्तव्य निभाया है। इंसाफ के लिए दर दर की ठोकरें खाई है लेकिन आखिरकार इंसाफ मिला।
आपको बता दें कि 16 दिसंबर, 2016 की रात अपने दोस्त के साथ फिल्म देखकर लौट रही 23 वर्षीय निर्भया के साथ छह लोगों ने चलती बस में गैंगरेप किया था। आरोपियों ने इस दौरान हैवानियत की सारे हदें पार कर दी थीं और बुरी तरह से घायल निर्भया और उसके दोस्त को सड़क किनारे फेंककर भाग गए थे। छात्रा का पहले सफदरजंग अस्पताल में इलाज चला, लेकिन कुछ दिन बाद सिंगापुर शिफ्ट कर दिया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में छह आरोपी थे, जिसमें एक नाबालिग था और एक ने तिहाड़ में खुदकुशी कर ली थी।

भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा पासपोर्ट…


भारत की केंन्द्र सरकार ने ये फैसला लिया है कि अब ऐसे किसी भी शासकीय कर्मचारी को पासपोर्ट जारी नही किया जाएगा जिसे भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित किया गया हो या फिर उसके खिलाफ मुकदमे को मंजूरी दे दी गई हो। यही नहीं अब ऐसे भ्रष्ट कर्मचारी जिनके पास अगर पहले से ही पासपोर्ट होगा तो उसे भी रद्द कर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट जारी किए जाने को लेकर बनी गाइडलाइन्स के दिशा निर्देशों और समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया है। इस आदेश में यह भी कहा गया है कि ऐसे सरकारी कर्मचारियों को पासपोर्ट बनवाने की मंजूरी के लिए सर्तकता और अनापत्ति की जांच जरूरी है। इस आदेश मे यह भी तय किया गया है कि अगर किसी अफसर के खिलाफ आपराधिक मामले मेें किसी जांच एजेंसी द्वारा एफआईआर दर्ज करवाई गई है या कोर्ट द्वारा उसे समन जारी किया गया है तो भी विजिलेंस से क्लीयरेंस मिलने के बाद पासपोर्ट रोका जा सकता है। पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6 (2) के तहत अधिकारी ऐसे किसी भी व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करने से इन्कार कर सकते हैं, जिसके बारे में लगे कि भारत के बाहर उसकी उपस्थिति किसी देश के साथ भारत के संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती है।

निर्भया केसः दोषियों को नया डेथ वारंट जारी… 20 मार्च को होगी फांसी…


निर्भया के के गुनहगारों के लिए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी कर दिया है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के गुरूवार को दिए फैसले के मुताबिक अब सभी दोषियों को 20 मार्च के सुबह 5ः30 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा। अदालत ने चैथी बार डेथ वारंट जारी किया है। सभी आरोपी पिछले काफी दिनो से तरह- तरह के कानूनी दाव पेंच और पैतरे अपनाकर बच रहे थे लेकिन चारों गुनहगारों के अब सारे विकल्प खत्म हो गए है। और फांसी होना लगभग तय है।
निर्भया की मां आशा देवी ने कोर्ट के आदेश पर खुशी जताते हुए कहा है कि मेरी बेटी के गुनहगार अब भी फांसी को टालने के लिए कोई और पैतरा अपना सकते हैं। हर चीज का एक अंत होता है और मुझे विश्वास है कि फाइनली उन्हें इस नए डेट पर फांसी दे दी जाएगी। जब तक दोषियों को फांसी नहीं हो जाती मैं हार नहीं मानूंगी। हर पल मैं लड़ने के लिए तैयार हूं। मुझे उसी दिन सकूंन मिलेगा जब ये चारों दोषी फांसी पर लटक जाएंगे।
इस ताजा डेथ वारंट पर दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि चार बार दोषियों की न्यायिक हत्या की जा चुकी है और कितनी बार की जाएगी। एपी सिंह ने कहा कि ये आतंकवादी नहीं हैं और जेल में रहकर अपना सुधार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी कानूनी विकल्प बचा हुआ है। उन्होंने कहा कि हमें डराया जा रहा है, मुझे प्रताड़ित भी किया जा रहा है।
वहीं कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक इस नई तिथि के बाद अब दोषियों के पास फांसी से बचने के लिए कोई विकल्प नही। बचा है। इससे पहले दिल्ली सरकार बिना वक्त गंवाए बुधवार को ही अपनी अर्जी लेकर अदालत पहुंची थी और निर्भया मामले में चारों दोषियों की फांसी की नई तारीख तय करने का अनुरोध किया था।
आपकों बता दें कि दक्षिणी दिल्ली के बसंत बिहार इलाके में पैरामेडिकल छात्रा निर्भया से 16 दिसंबर, 2012 की रात 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की थी। गंभीर जख्मों के कारण 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। घटना के 9 महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने 5 दोषियों राम सिंह, पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को फांसी की सजा सुनाई थी। मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी थी। ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है।

पुलवामा हमलाः एनआईए को मिली बड़ी सफलता… जैश का आतंकी शाकिर बशीर हुआ गिरफ्तार…


जम्मू- कश्मीर के पुलवामा हमला मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को बड़ी सफलता मिली है। एनआईए ने पिछले साल हुए इस मामले में आतंकियांे के सबसे बड़े मददगार शाकिर बशीर को गिरफ्तार किया है। शाकिर बशीर जैश का स्थानीय आतंकी है। उसी ने पुलवामा हमले के आरोपी अहमद डार की को अपने घर पनाह दी थी और अन्य मदद भी की थी। एनआईए के मुताबिक 22 वर्षीय शाकिर बशीर पुलवामा के काकापोरा के हाजीबल का रहने वाला है। उसकी फर्नीचर की दुकान है। पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक ने 2018 के मध्य में शाकिर की डार से पहचान करवायी थी और इसके बाद ही वह जैश के लिए काम करने को तैयार हुआ था। एनआईए ने बताया की पूछताछ में शाकिर ने ये कबूल किया है कि आदिल डार उसके घर अपने साथियों के साथ रुका था और वहीं से उसने पुलवामा हमले की पूरी तैयारी की। जहां पर हमला हुआ था, वहीं शाकिर की दुकान थी, वहीं से शाकिर ने सीआरपीएफ के काफिले की जासूसी की और आदिल डार को पूरी जानकारी दी थी। पूछताछ के लिए एनआईए ने शाकिर को 15 दिन की रिमांड में लिया है। आपको बता दंे कि पिछले साल 14 फरवरी को आंतकियों द्वारा की गई इस दर्दनाक घटना ने सारे देश को झकझोर कर रख दिया था। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर हमलावर ने विस्फोटक भरी कार से सीआरपीएफ काफिले की बस को टक्कर मार दी थी। धमाका इतना भयंकर था कि बस के परखच्चे उड़ गए। इसके बाद घात लगाए आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग भी की। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

यूपी के सोनभद्र की पहाड़ियों में मिला सोने का भंडार…


भारत को यूं ही सोने कीे चिड़िया नहीं कहा जाता। भले ही समय- समय पर अलग- अलग आक्रमणकारी कभी मुगल तो कभी अंग्रजों ने यहां के खजाने पर बुरी नजर डाली और इन्हें लूटा भी लेकिन आज भी हमारा देश कितना संपन्न है। इसका उदाहरण उत्तरप्रदेश का सोनभद्र जिला है जहां से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रहीं है जो निश्चित तौर पर चैंकाने के साथ ही हैरान करने वाली भी है। यूपी के सोनभद्र जिले से राज्य के खनिज विभाग को 3 हजार टन सोना मिला है जो जमीन के अंदर दबा हुआ है। गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से सोने की तलाश कर रहे भू वैज्ञानिकों को आखिरकार सफलता मिल ही गई। एक ही जिले में दो जगह सोने के अयस्क मिले हैं कुल तीन हजार टन सोने के अयस्क से करीब डेढ़ हजार टन सोने का खनन किया जाएगा। इनके खनन के लिए नीलामी प्रक्रिया से पूर्व जिओ टैगिंग की कार्रवाई शुरू की गई है। सोनभद्र में सोने के उत्खनन का रास्ता साफ होने से पहले खनिज निदेशालय जिओ टैगिंग करवा रहा है जिओ टैगिंग के लिए शासन ने 7 सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम 22 फरवरी तक शासन को रिपोर्ट सौंपेगी। जिसके बाद ब्लाकों की नीलामी की प्रक्रिया योगी सरकार द्वारा की जाएगी।
आपकों बता दें कि गुलामी के दौर में अंग्रेजों ने भी यहां सोने की खान का पता लगाने की पूरजोर कोशिश की थी लेकिन, वह इसमें कामयाब नहीं हो सके थे। आजादी से पहले ही हुई सोने की खोज के चलते इस पहाड़ी का नाम ही सोन पहाड़ी पड़ गया था। तब से लेकर अब तक यहां के आदिवासी इसे सोन पहाड़ी के नाम से ही जानते हैं। उन्हें इस बात का तनिक भी इल्म नहीं था कि इन पहाड़ियों के गर्भ में तीन हजार टन सोना दबा पड़ा है। लेकिन अब यहां पर सोने के अपार भंडार मिलने के बाद यह पूरी दुनिया की निगाह में आ गया है।

निर्भया केसः गुनहगारों के लिए नया डेथ वारंट जारी3 मार्च को सुबह 6 बजे दी जाएगी फांसी


निर्भया के गुनहगारों के लिए दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने सोमवार को नया डेथ वारंट जारी किया है। पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले के मुताबिक, 3 मार्च को सभी दोषियों को सुबह 6 बजे फांसी दी जाएगी। निर्भया के दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी करने की मांग वाली अर्जी पर पटियाला हाउस कोर्ट सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के कोर्ट ने यह फैसला दिया है। गौरतलब है कि सभी दोषियों को 1 फरवरी को फांसी होनी थी मगर निचली अदालत ने 31 जनवरी को निर्भया मामले सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दोषियों की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। र्कोअ से फैसला आने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने फांसी की नई तारीख पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुझे उम्मीद है कि 3 मार्च को दोषियों को फांसी होगी। वहीं निर्भया के पिता बद्रीनाथ ने भी कहा कि बहुत अच्छी बात हैं, लोग खुश हैं, पूरा देश खुश है। लगता है कि अब बिल्कुल फांसी हो जाएगी। हालांकि फैसले के बाद दोषियों के वकील एपी सिंह का दावा है कि उनके पास अब भी कई कानूनी विकल्प बाकी है। कोर्ट का यह फैसला मीडिया और राजनेताओं का प्रेशर है, जिसके कारण फांसी की तारीख आई है।आपको बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 हुई इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। उस रात दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा (निर्भया) के साथ गैंगरेप और बर्बरता की गई थी और सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।

कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की बड़ी जीत


केरल में तीनों मरीजों की अस्पताल से छुट्टी
एक ओर जहां दुनियाभर में और खासकर चीन में तांडव मचा रहा कोरोना वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। लेकिन भारत को कोरेनावायरस पर बड़ी सफलता मिली है। देश के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने जानकारी दी है कि केरल में जिन तीन लोगों में कोरोनावायरस की पुष्टी हुई थी उनमें से तीसरे मरीज का भी संक्रमण अब खत्म हो गया है और यही नहीं उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है। इससे पहले केरल के दो मरीजों को कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। इसमें एक का इलाज कसारगोड के कंझनगढ़ सरकारी अस्पताल में चल रहा थी, जबकि दूसरे छात्र का अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज में अस्पताल चल रहा था। आपको बता दें कि चीन में इस खतरनाक वायरस के चलते रोजाना सैकड़ों जानें जा रही हैं। ताजा आंकड़े की बात करें तो मरने वालों की संख्या 1,765 पहुंच गई है। हाल ही में इसके संक्रमण से एशिया के बाहर मौत का पहला मामला सामने आया। फ्रांस घूमने गई एक 80 वर्षीय चीनी महिला पर्यटक की मौत इस वायरस के कारण हुई है। चीन के हुवई प्रांत की महिला 16 जनवरी को फ्रांस गई थीं और संक्रमित होने पर 25 जनवरी को उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उसकी मौत हो गई। वहीं, दुनियाभर के 67 हजार से ज्यादा लोग अब तक इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।
चीन के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक कुल 66,492 मामलों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। देश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने कहा कि 2,641 नए मामले शुक्रवार को सामने आए। वहीं शनिवार को 1,373 मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई। चीन के अलावा हांगकांग में भी एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह संक्रमण के 56 मामले सामने आए हैं। मकाउ में भी 10 मामलों की पुष्टि हुई है।

भोपाल रेल्वे स्टेशन पर बड़ा हादसा

भोपाल रेल्वे स्टेशन पर बड़ा हादसा
यात्रियों पर गिरा पुल का हिस्सा 7 लोग घायल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मुख्य रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक दो और तीन पर गुरूवार को फुटओवर ब्रिज का एक हिस्सा गिर गया, जिसके चलते मलबे में दबकर 7 यात्री घायल हो गए हैं। हादसा सुबह तकरीबन 9 बजे के आसपास हुआ है। हादसे के वक्त यात्री आ- जा रहे थे इसी दौरान ब्रिज का एक हिस्सा ढ़ह गया। सूत्रों ने बताया कि मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल यात्रियों को मलबे से निकाला। इस बीच रेलवे का अमला भी पहुंच गया और घायल यात्रियों को यहां के हमीदिया अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है। मध्य प्रदेश सरकार ने हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को 50-50 हजार और मामूली रूप से चोटिल लोगों को 10-10 रुपये आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल रेलवे स्टेशन में हुए हादसे पर दुख जताते हुए घायलों के समुचित इलाज और हरसंभव मदद के निर्देश दिए हैं। वहीं प्रदेश के जनसंर्पक मंत्री पीसी शर्मा ने मीडिया से चर्चा में इस घटना पर दुखद जताया है और कहा कि वे इस घटना के पीड़ितों को मुआवजे दिलाने की मांग को लेकर रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी में मामला लापरवाही का प्रतीत हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर सरकार के संशोधन को दी मंजूरीे बिना शुरूआती जांच के होगी गिरफ्तारी


सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण संशोधन कानून, 2018 को बरकरार रखने को फैसला सुनाया है। एससी- एसटी संशोधन कानून 2018 की वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट के लिए गए फैसले के बाद अब सिर्फ शिकायत के आधार पर  बिना किसी जांच के तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान जारी रहेगा और इस कानून के तहत किसी शख्स को अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी। दरअसल, 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी ऐक्ट के गिरफ्तारी के प्रावधान को हल्का कर दिया था और अग्रिम जमानत का प्रावधान कर दिया था। इसके बाद संसद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए कानून में संशोधन किया गया था। इसे भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
यह फैसला जस्टिस अरुण मिश्रा, विनीत सारण और रविन्द्र भट की ओर से सुनाया गया है। तीन जजों की पीठ में दो-एक से यह फैसला कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि कोई अदालत सिर्फ ऐसे ही मामलों पर अग्रिम जमानत दे सकती है जहां प्रथमदृष्टया कोई मामला नहीं बनता हो। जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के लिए शुरुआती जांच की जरूरत नहीं है और इसके लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मंजूरी की भी आवश्यकता नहीं है। वहीं पीठ के अन्य सदस्य न्यायमूर्ति रवीन्द्र भट ने सहमति वाले एक निर्णय में कहा कि प्रत्येक नागरिक को सह नागरिकों के साथ समान बर्ताव करना होगा और बंधुत्व की अवधारणा को प्रोत्साहित करना होगा। न्यायमूर्ति भट ने कहा कि यदि प्रथमदृष्टया एससी-एसटी अधिनियम के तहत कोई मामला नहीं बनता तो कोई अदालत प्राथमिकी को रद्द कर सकती है।

कश्मीरः आतंकी मूसा के वारिस हमीद ललहारी को किया ढ़ेर

ऑपरेशन-ऑल-ऑउट के तहत जम्मू- कश्मीर में आतंक के आकाओं का फन कुचलने में लगी भारतीय सेना को बड़ी कामयाबी मिली है। जाकिर मूसा के मारे जाने के बाद अल कायदा से जुड़े संगठन अंसार गजवत उल हिंद की कमान संभालने वाले आतंकी हामिद ललहारी को भी अब सेना ने मौत के घाट उतार दिया है। मंगलवार को हुए इस एनकाउंटर में तीन आतंकी मारे गए हैं। इनकी पहचान हामिद लोन, नवीद तक और जुनैद भट के रूप में हुई है। आपको बता दें कि इसी साल 24 मई को पुलवामा जिले में सेना की जॉइंट टीम ने एक मुठभेड़ में जाकिर मूसा को ढेर कर दिया था। इसके बाद जून में हामिद ललहारी इस आतंकी संगठन का नया चीफ बनाया गया था। मूसा जब घाटी में आतंकी संगठन चला रहा था तब हामिद उसका सहयोगी था। मूसा की मौत के बाद हामिद घाटी में आतंकी साजिशों को अंजाम दे रहा था।
सूत्रों के अनुसार, आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना के आधार पर सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और पुलिस के विशेष अभियान समूह ने संयुक्त अभियान छेड़ा था। सुरक्षा बल के जवान इलाके की घेराबंदी कर रहे थे, तभी आतंकवादियों ने स्वाचालित हथियारों से उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई में गोलियां चलायी। मुठभेड़ स्थल से हथियार और विस्फोटक भी बरामद किये गये हैं।
जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी कि आतंकी संगठन अंसार गजवत उल हिंद का सफाया हो गया है। डीजीपी ने कहा कि त्राल एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों की पहचान हो गई है। ये तीनों आतंकी संगठन अंसार गजवत उल हिंद के थे। इस एनकाउंटर में कमांडर हामिद लल्हारी भी मार गिराया गया है।