Dhanteras धनतेरस के दिन न खरीदे से चीजें, अशुभ माना जाता है

हिंदी पंचाग के अनुसार दिवाली का प्रारंभ धनतेरस से माना जाता है। इस वर्ष धनतेरस 25 अक्टूबर को है। यह हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है। इस दिन मां लक्ष्मी कि साथ ही धनवंतरी की भी पूजा विधान है। लोगों में ऐसी मान्यता है कि इस दिन शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने से लक्ष्मी माता की कृपा उनके परिवार पर होती है और वर्ष भर आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। धनतेरस पर आप भी खरीदारी करेंगे, ऐसे में आपको पता होना चाहिए कि कौन सी वस्तु आपके लिए शुभ और मंगलकारी होगी और कौन सी वस्तु आपको नहीं खरीदनी चाहिए। धनतेरस के दिन वर्तनों ओर आभूषणों का खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं कुछ वस्तुओं को खरीदने के अशुभ प्रभाव होते है। आईए जानते है कि धनतेरस के दिन हमें कौन सी चीजे नहीं खरीदनी चाहिए।
लोहा- धनतेरस पर लोहे से बने सामान घर में नहीं लाने चाहिए। लेकिन अगर आप विशेष रूप से लोहे के बर्तन लाने के बारे में सोच हैं, तो इसे एक दिन पहले खरीद लें। इसका हमारे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
स्टील- कई लोग धनतेरस पर स्टील के बर्तन खरीदते है। चूंकि स्टील लोहे का दूसरा रूप है, इसलिए कहा जाता है कि व्यक्ति को स्टील के बर्तनों से बचना चाहिए और इसके बजाय पीतल तांबे या कांसे की चीजें खरीदनी चाहिये। 
खाली घड़े, बर्तन- पौराणिक मान्यताओं के आधार पर कहा जाता है किघर में खाली घड़ा या बर्तन ले जाने से घर में कभी लक्ष्मी जी नहीं आती। इसलिये घर के अंदर खाली बर्तन ले जाने से पहले उसमें पानी या कोई अन्य वस्तु भर कर साथ ले जाएं। 
नुकीली या धारदार वास्तु- धनतेरस की खरीदारी के मौके पर चाकू, कैंची और अन्य धारदार वस्तुएं न खरीदें। 
कार- धनतेरस पर कई लोग अपने घर नई कार खरीद कर लाते हैं क्योंकि यह एक शुभ दिन माना जाता है। लेकिन मान्यता के अनुसार अगर आप धनतेरस के दिन कार खरीद रहें हैं तो उसका भुगतान धनतेरस से एक दिन पहले कर दें। 
काले कपड़े- धनतेरस एक शुभ दिन है। काले रंग को हमेशा दुर्भाग्य से जोड़ा जाता है जो अच्छा नहीं होता इस लिए इस दिन न तो काले रंग का कपड़ा या फिर काले रंग की किसी भी प्रकार की वस्तु खरीदने से बचना चाहिए।
कांच से बनी चीजें- धनतेरस के दिन कांच या कांच से बनी किसी भी वस्तु को नही खरीदना चाहिए। कांच का संबध राहू से है और राहू को नीच ग्रह माना जाता है। इस लिए इस दिन ग्रह नक्ष़त्रों को ठीक रखने के लिए कांच से निर्मित किसी भी चीज को खरीदने से बचना चाहिए। 
कांटेदार पौधे- प्रायः इस दिन घर के गार्डेन के लिए पौधे भी खरीदते हैं तो इस दिवस पर कांटेदार पौधे घर पर विशेषकर नागफनी इत्यादि न लाएं।

जानें आखिर क्यों करवा चौथ पर महिलाएं छलनी से करती है, चांद और पति का दीदार

करवा चौथ का दिन विवाहित महिलाओं के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए न सिर्फ व्रत रखती हैं बल्कि पूरे साज और सोलह श्रृगांर के साथ चांद की पूजा भी करती है। चांद को अर्ध्य देने के बाद वो छलनी से चांद को देखती है फिर उसी छलनी से पति की सूरत निहारती है। करवा चौथ पर चांद को छलनी से देखने की परंपरा सदियों पुरानी है। आईए जानते हैं आखिर करवा चौथ पर महिलाए छलनी से क्यो करती है चांद और पति का दीदार।अगर धार्मिक आधार पर देखें तो हिंदू धर्म में चंद्रमा को भगवान ब्रह्मा का रूप माना जाता हैं। एक मान्यता यह भी है कि चांद को लंबी उम्र का वरदान प्राप्त है और चांद की पूजा करने से दीर्घायु प्राप्त होती है। चंद्रमा भगवान शिव के सर पर विराजता है। चंद्रमा की पूजा उसकी शीतलता, प्रेम, सुंदरता और लंबी आयु के कारण होती है। चंद्रमा में मौजूद ये सभी गुण हर महिला अपने पति में चाहती है।  इसलिए पति की दीर्घायु के लिए करवा चौथ का व्रत रखकर पत्नी पहले चांद को छलनी से निहारती है और फिर छलनी से अपने पति का दीदार कर कामना करती है कि उसका पति भी चंद्रमा की तरह ही गुणवान हो और उसकी उम्र लंबी हो। वहीं, चांद को सुंदरता का प्रतीक भी माना गया है, उसे किसी की नजर न लग जाए इसलिए उसे छलनी की आड़ से देखा जाता है।वहीं, पौराणिक कथाओं के अनुसार एक साहूकार की बेटी ने अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था पर अत्यधिक भूख की वजह से उसकी हालत खराब होने लगी थी। यह देखकर साहूकार के बेटों ने अपनी बहन से खाना खाने को कहा लेकिन साहूकार की बेटी ने खाना खाने से मना कर दिया। भाइयों से बहन की ऐसी हालत देखी नहीं गई तो उन्होंने चांद के निकलने से पहले ही एक पेड़ पर चढ़कर छलनी के पीछे एक जलता हुआ दीपक रखकर बहन से कहा कि चांद निकल आया है। बहन ने भाइयों की बात मान ली और दीपक को चांद समझकर अपना व्रत खोल लिया और व्रत खोलने के बाद उसके पति की मुत्यु हो गई। ऐसा कहा जाता है असली चांद को देखे बिना व्रत खोलने की वजह से ही उसके पति की मृत्यु हुई थी। तब से अपने हाथ में छलनी लेकर बिना छल-कपट के चांद को देखने के बाद पति को निहारने की परंपरा शुरू हुई है।

आखिर कुछ लोगों को ही ज्यादा क्यों काटते है मच्छर…

मच्छरों के काटने से तो लगभग सभी लोग परेशान रहते है। अगर आप भी उनमें से एक है जिनका मच्छर चुन-चुन कर पीछा करते है तो ये जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है। आपने अपने आसपास कुछ लोगों को हमेशा मच्छर ज्यादा काटने की शिकायत करते हुए देखा और सुना, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये बात सच है कि कई लोगों को कुछ खास कारणों की वजह से मच्छर ज्यादा काटते हैं। अगर आपके पास बैठे शख्स को बार-बार मच्छर काट रहे हैं और आपको नहीं, तो ये कोई चमत्कार नहीं बल्कि ऐसा होना एक सामान्य घटना है। शोध के मुताबिक, लोगों की पसीने की गंध के अलावा अन्य कारणों की वजह से अक्सर कुछ लोगों को मच्छर ज्यादा काटते हैं। ऐसे में अगर आपको भी मच्छर ज्यादा काटते हैं, तो आइए जानते हैं इसकी मुख्य वजह…
कार्बन डाई ऑक्साइड की महक- अगर आपको सामान्य तौर पर बैठने पर भी मच्छर काटते हैं, तो इसका एक मुख्य कारण आपके शरीर से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड है। शोध के मुताबिक, मच्छर 4-5 किलोमीटर से कार्बन डाई ऑक्साइड की महक को महसूस कर लेते हैं। ऐसे में ज्यादा गैस पास करने वाले लोगों को अन्य की तुलना में मच्छर अधिक काटते हैं।
पसीने की गंध- अगर आपको भी बार-बार मच्छर काटने की समस्या रहती है, तो इसकी मुख्य वजह है आपका पसीना। क्योंकि पसीने में यूरिक एसिड, अमोनिया और लैक्टिक एसिड जैसे तत्व पाए जाते हैं। जिससे मच्छर जल्दी आकर्षित होते हैं, इसलिए अक्सर लोग एक्सरसाइज के समय मच्छर काटने की शिकायत करते हैं।
बीयर या एल्कोहल का ज्यादा उपयोग- अगर आप बीयर या एल्कोहल का ज्यादा सेवन करते हैं। तो इससे भी मच्छर आपको ज्यादा काटते हैं, क्योंकि इससे आपके शरीर में इथेनॉल रसायन की मात्रा बढ़ जाती है। शोध के मुताबिक, मच्छर इथेनॉल की तरफ आकर्षित होते हैं।
ब्लड ग्रुप में अंतर – एक अध्ययन के मुताबिक, मच्छर आमतौर पर हमारे रक्त से प्रोटीन को लेते हैं। ऐसे में जिस ब्लड ग्रुप में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। उन्हें अन्य की तुलना में मच्छर ज्यादा काटते हैं। आमतौर पर ओ ब्लड ग्रुप के लोगों को मच्छर अधिक काटने की समस्या का सामना करना पड़ता है। ।
कपड़ो का रंग- एक शोध के मुताबिक मच्छर में रंग को पहचानने की क्षमता होती है। जिसकी वजह से वो लाल, बैंगनी और पीले जैसे चमकदार रंगों को पहचान लेते हैं और उनकी तरफ आसानी से आकर्षित हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी चटकीले रंगों के कपड़े ज्यादा पहनते हैं, तो आप उनके काटने के शिकार हो सकते हैं।
गर्भावस्था में- कई रिचर्स ये साबित कर चुकी हैं कि गर्भवती महिलाओं को मच्छर अधिक काटते हैं। इसका कारण ये है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं सांस छोड़ते वक्त 21 प्रतिशत अधिक कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती हैं। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान उनका शारीरिक तापमान थोड़ा अधिक होता है जिससे मच्छर तेजी से आकर्षित होते हैं।

टीचर्स डेः अपने गुरु आचरेकर को याद कर भावुक हुए सचिन

लिखा हमेशा आभारी रहूंगा…
सचिन तेंदुलकर ने अगर क्रिकेट की दुनिया में इतना नाम कमाया है तो उसकी बड़ी वजह उनके गुरु रमाकांत आचरेकर हैं। आचरेकर सचिन की प्रतिभा को पहचानने वाले पहले व्यक्ति थें। उन्होंने ही सचिन को क्रिकेट सिखाया था। बचपन में जब सचिन नेट्स पर खेलते-खेलते थक जाते थे, तो आचरेकर स्टंप पर एक सिक्का रख देते थे और जो सचिन को आउट करता, वह सिक्का उसका हो जाता था।
आज टीचर डे के मौके पर उन्हे याद करते हुए सचिन ने उनके साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर को ट्वीट करते हुए कहा कि उनके बचपन और क्रिकटे को तराशने वाले उनके कोच रमाकांत आचरेकर ने सिर्फ क्रिकेट ही नहीं बल्कि उन्हें जिंदगी से जुड़ी कई अन्य सीख भी दीं है। उन्होंने कहा कि अध्यापक केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि मूल्य भी देते हैं। सचिन ने लिखा, मेरी जिंदगी में उनके अमूल्य योगदान के लिए मैं हमेशा उनका ऋणी रहूंगा। उनकी सीख मुझे आज भी गाइड करती है।
आपको बता दें कि आचरेकर सचिन के अलावा दिग्गज क्रिकेटर अजित अगरकर, चंद्रकात पाटिल और प्रवीण आमरे के भी कोच रहे। रमाकांत आचरेकर का इसी साल 2 जनवरी को निधन हो गया था।

हरतालिका तीज व्रत को लेकर असमंजस की स्थिति ?

तीज का व्रत और पूजन एक को करें या दो सितंबर को
सुहागिनों के अंखड सौभाग्य और कुवांरी कन्याओं को अच्छे वर की कामना के साथ किये जाने वाले हरतालिका तीज व्रत को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
व्रत किस दिन रखा जाए इस बात को लेकर पंचांग के जानकार और ज्योतिषियों और विद्वानों में भी मतभेद है। सुहागन महिलाओं का अत्यंत प्रिय पर्व हरतालिका तीज इस वर्ष 1 और 2 सितंबर को है। विद्वानों में तिथि को लेकर मतभेद हैं। कुछ इसे 1 सिंतबर को मनाए जाने का समर्थन कर रहे हैं जबकि कुछ इसे 2 सितंबर को मनाए जाने के पक्ष में हैं। इस साल यह व्रत पंचागों में अंतर के कारण दो दिन मनाई जाएगी। चित्रा पक्षीय कैतकी गणना से तैयार पंचांगों में हरतालिका तीज 1 सितंबर को मनाई जाएगी। जबकि अन्य पंचाग में हरतालिका तीज का व्रत 2 सितंबर को रखा जाएगा। हालांकि धर्मशास्त्र व शताब्दी पंचांग के अनुसार 1 सितंबर को हरतालिका तीज का व्रत रखना श्रेष्ठ बताया गया है।
ज्योतिष के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज के नाम से पहचाना जाता है। पंचांगीय गणना और धर्मशास्त्रीय मान्यता के आधार पर इस बार ग्रह गोचर के तिथि अनुक्रम से तृतीया तिथि को लेकर दो गणनाओं का अलग-अलग मत प्रकट हो रहा है। चित्रा पक्षीय पंचांग में हरतालिका तीज 1 सितंबर रविवार को सुबह 8.28 के बाद लगेगी। जो अगले दिन सोमवार को सुबह 8.58 तक रहेगी। वहीं ग्रहलाघवी पद्धति से निर्मित पंचागों में 2 सितंबर को हरतालिका तीज बताई गई है। इस दिन तृतीया तिथि 2 घंटे 45 मिनट रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। 2 सितंबर को आधे दिन हरतालिका तीज है। इसी दिन गणेश स्थापना होगी। अतः 1 सितंबर को तीज मनाया जाना ही उचित है।