क्यों छोड़ दी दंगल गर्ल ने पुलिस की नौकरी….

दंगल गर्ल के रूप में अपनी पहचान बना चुकीं अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान बबीता फोगाट नेे हरियाणा पुलिस की एसआइ की नौकरी छोड़ दी है। बबीता ने नौकरी छोड़ने का कारण सक्रिय राजनीति में आने को बताया है। उन्होंने अपना इस्तीफा 13 अगस्त को भेजा था, जिसे पुलिस उच्चाधिकारियों ने अब स्वीकार किया है। गौरतलब है कि बबीता ने दिल्ली में गत 12 अगस्त को अपने पिता एवं द्रोणाचार्य अवॉर्डी महाबीर फोगाट के साथ भाजपा की सदस्यता ली थी। पुलिस की नौकरी छोड़ने के बाद बबीता फोगाट अब राजनीतिक पारी खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान भिवानी और दादरी जिलों में वह उनके साथ रहीं थीं। बाढड़ा में बबीता ने शक्ति प्रदर्शन भी किया। मुख्यमंत्री ने भी उनको खूब तवज्जो दी। मुख्यमंत्री के करीबियों और केंद्र की राजनीति में गहरी पैठ रखने वालों का तो यहां तक कहना है कि हाईकमान की तरफ से बबीता फोगाट को विधानसभा चुनाव में दादरी या बाढड़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।बता दें कि बबीता ने 2018 में गोल्ड कोस्ट में खेले गए 53 किलो महिला कुश्ती स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। उन्होंने 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ में रजत और ग्लास्गो में 2014 में स्वर्ण पदक जीता था। उनके पिता और कोच महावीर फोगाट को द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

बगैर अनुमति के धरना, प्रर्दशन किया तो होगी कानूनी कार्यवाही

बिना प्रशासन कि अनुमति के धरना-रैली, और प्रदर्शन से आम आदमी को होने वाली असुविधा को देखते हुए भोपाल आईजी योगेश देशमुख ने इस संबंध में एक पत्र जारी करते हुए अपनी रेंज के दोनों डीआईजी और सातों एसपी को निर्देश दे दिए हैं। अब पुलिस-प्रशासन की इजाजत के बगैर भोपाल, सीहोर, राजगढ़ और विदिशा जिलों में धरना-रैली, प्रदर्शन या आंदोलन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  फिर चाहे वो राजनैतिक दल, स्वयंसेवी संगठन, छात्र संगठन या सामाजिक संगठन ही क्यों न हों। इस पत्र में कहा गया है कि अनुमति लेकर किए जाने वाले धरना-प्रदर्शन के लिए भी अलग स्थान चिह्नित करवाएं, ताकि आम जनता को इससे कोई परेशानी न हो। 
गौरतलब है कि अपनी मांगों को लेकर कई संगठन धरना-प्रदर्शन के लिए प्रशासन से अनुमति लेते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं, जो ऐसा नहीं करते हैं। और अचानक हुए इस तरह के धरना-रैली और ऐसे प्रदर्शनों के बाद अचानक कानून व्यवस्था की स्थिति बनती है और इस आकस्मिक परिस्थिति से आम जनता भी परेशानी होती है। इसके साथ ही आपातकालीन चिकित्सीय सुविधाएं, स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं को भी परेशानी उठानी पड़ती है।