कोरोना नें दी कमलनाथ सरकार को राहत… नहीं हुआ फ्लोर टेस्ट विधानसभा 26 मार्च तक स्थगित…

मध्यप्रदेश में पिछले काफी समय से चल रहे सियासी घमासान के बीच कमलनाथ सरकार को फिलहाल कोरोना वायरस की वजह से फ्लोर टेस्ट से राहत मिल गई है। विधान सभा स्पीकर एनपी प्रजापति ने विधान सभा को 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया है। विधानसभा के बजट सत्र के पहले हीं दिन जमकर हंगामा हुआ। विधानसभा में राज्यपाल लालजी टंडन के भाषण की शुरुआत में ही टोका-टाकी शुरू हो गई थी। हंगामे के  चलते कार्यवाही पहली बार लगभग पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। लगभग पांच मिनट बाद कार्यवाही फिर शुरू होने पर अध्यक्ष ने बोलना प्रारंभ किया। वहीं बीजेपी सदस्य भी एक साथ बोलने लगे। नेता प्रतिपक्ष भार्गव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और अन्य भाजपा विधायक मौजूदा राजनीतिक स्थितियों पर ही बोल रहे थे। उधर, सत्तारूढ दल के सदस्य भी एक साथ बोलने लगे।
बीजेपी की तरफ से नरोत्तम मिश्रा ने राज्यपाल से कहा कि जो सरकार अल्पमत में है, क्या राज्यपाल उसी सरकार की तारीफ की कसीदे पढ़ने आए हैं। इसके बावजूद लालजी टंडन बोलते रहे। फिर राज्यपाल ने एक मिनटे से भी कम में अपने भाषण को खत्म कर दिया। उन्होंने अंत में यह कहा कि विधायक मध्य प्रदेश के गौरव की रक्षा करें और संविधान के नियमों का पालन करें। शोरगुल के बीच अध्यक्ष प्रजापति ने देश में कोरोना के प्रकोप का जिक्र किया और इसके साथ ही सदन की कार्यवाही 26 मार्च को सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई। वहीं बीजेपी ने सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हैै। बीजेपी की ओर से अदालत में दी गई याचिका में फ्लोर टेस्ट की मांग की गई है।

अब पार्षद ही चुनेगें महापौर और अध्यक्ष, राज्यपाल ने दी अध्यादेश को मंजूरी

काफी दिनों से चल रहीे सियासी हलचल के बाद राज्यपाल लालजी टंडन ने मध्यप्रदेश नगर पालिका विधि संशोधन अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इस अध्यादेश के लागू होने पर नगरीय निकायों में अब करीब 20 साल बाद फिर से जनता के बजाय पार्षद महापौर व अध्यक्ष को चुनेंगे। सीएम कमलनाथ ने सोमवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें अध्यादेश में होने वाले बदलाव के सभी पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी थी। ठीक उसके दूसरे दिन राज्यपाल ने इस अघ्यादेश को मंजूरी दे दी है। विधानसभा शीतकालीन सत्र में इस अध्यादेश को पेश किया जाएगा।
गौरतलब है कि नगरीय निकायों के अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया में परिवर्तन संबधी इस अध्यादेश को केबिनट में पारित करवाने के बाद सरकार ने इसे राज्यपाल के पास भेजा था पर राज्यपाल ने इस अध्यादेश को मंजूरी नहीं देते हुए इसे रोक लिया था।
बता दें कि इससे पहले इस प्रस्ताव को लेकर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई थी। भाजपा शुरू से ही इस फैसले के विरोध में है। कई भाजपा नेता और पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने राज्यपाल से मिलकर इस प्रस्ताव का विरोध किया था और अध्यादेश को मंजूरी नही देने का आग्रह भी किया था। भाजपा का मानना है कि महापौर और अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से ही होना चाहीए कांग्रेस ने हार के डर से यह फैसला लिया है। वहीं कांग्रेस नेता विवेक तन्खा नें ट्वीट कर राज्यपाल से राजधर्म निभाने की बात कही थी।

नाव प्रतिबंधित, सिर्फ क्रेन से होगा मूर्ती विर्सजनः मंत्री श्री शर्मा

दुर्गा विसर्जन का जुलूस भोपाल की शान है। यह मध्यप्रदेश में अपनी अलग पहचान रखता है। सभी धार्मिक परम्पराओं और मान्यताओं के आधार पर सुरक्षा व्यवस्थाओं के साथ विसर्जन होगा। यह कहना है जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा का। उन्होंने विर्सजन स्थलों के निरक्षण के दौरान कहा कि भोपाल में बड़ी मूर्तियों का विसर्जन क्रेन और स्लाइडर से किया जाएगा। और ये सभी विसर्जन नगर निगम के नियुक्त विशेषज्ञों के द्वारा किए जायेगे, दुर्गा समितियां पूजन के बाद विसर्जन स्थल पर मूर्तियों को नगर निगम की टीम को सौप दिया जाएगा उसके बाद नगर निगम क्रेन और अन्य माध्यमों से विसर्जन करेंगे। उन्होंने बताया कि शहर के सभी  मुख्य विसर्जन स्थलों पर मूर्ति विसर्जन के लिए क्रेन की व्यवस्था की गई है इसके साथ ही कुंड भी तैयार कराये गए है। ज्वारे विसर्जन के लिये भी महिलाओं के लिए काली घाट पर व्यवस्था करने के निर्देश दिये गए है।  
निरीक्षण के दौरान विधायक श्री आरिफ मसूद ने कहा कि जान माल की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। प्रशासन के साथ आम जनता और जनप्रतिनिधियों को भी जिम्मेदारी पूरी शिद्दत से निभानी होगी। उत्साह-उमंग और धार्मिक मान्यताओं  के साथ सभी त्यौहार मनाए  जाते है और ऐसे ही मानाएं जाएंगे । उंन्होंने ये भी कहा कि त्यौहार के बाद खटलापुरा के सभी घाटों का निर्माण वो विधायक निधि से कराएंगे।

बगैर अनुमति के धरना, प्रर्दशन किया तो होगी कानूनी कार्यवाही

बिना प्रशासन कि अनुमति के धरना-रैली, और प्रदर्शन से आम आदमी को होने वाली असुविधा को देखते हुए भोपाल आईजी योगेश देशमुख ने इस संबंध में एक पत्र जारी करते हुए अपनी रेंज के दोनों डीआईजी और सातों एसपी को निर्देश दे दिए हैं। अब पुलिस-प्रशासन की इजाजत के बगैर भोपाल, सीहोर, राजगढ़ और विदिशा जिलों में धरना-रैली, प्रदर्शन या आंदोलन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  फिर चाहे वो राजनैतिक दल, स्वयंसेवी संगठन, छात्र संगठन या सामाजिक संगठन ही क्यों न हों। इस पत्र में कहा गया है कि अनुमति लेकर किए जाने वाले धरना-प्रदर्शन के लिए भी अलग स्थान चिह्नित करवाएं, ताकि आम जनता को इससे कोई परेशानी न हो। 
गौरतलब है कि अपनी मांगों को लेकर कई संगठन धरना-प्रदर्शन के लिए प्रशासन से अनुमति लेते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं, जो ऐसा नहीं करते हैं। और अचानक हुए इस तरह के धरना-रैली और ऐसे प्रदर्शनों के बाद अचानक कानून व्यवस्था की स्थिति बनती है और इस आकस्मिक परिस्थिति से आम जनता भी परेशानी होती है। इसके साथ ही आपातकालीन चिकित्सीय सुविधाएं, स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं को भी परेशानी उठानी पड़ती है। 

अभिलाषा सी बेटी है तो कल है सम्मान

भोपाल। राजधानी की युवा नृत्यांगना और संगीत शिक्षिका अभिलाषा तिवारी को इलाहाबाद की संस्था पूनम संत महिला एवं विकास समिति द्वारा नारी सशक्तिकरण के लिए आयोजित कार्यक्रम बेटी है तो कल है में सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान प्रदेश के पुलिस उप महानिदेशक कल्याण एवं लेखा श्री विजय कटारिया और संस्था की अध्यक्ष पूनम संत के हाथों गांधी भवन में प्रदान किया गया। इस अवसर पर जालंधर से आए प्रसिद्ध गायक पारस कपूर ने बेटी बचाओ अभियान से जुड़ी कुछ रंगारंग प्रस्तुतियां भी दीं। 

आखिर खुल ही गए भदभदा के गेट…

भोपाल। राजधानी पर मानसून काफी मेहरबान नजर आ रहा है। पिछले पांच दिनों से हो रही झमाझम और रिमझिम ने शहर को पानी-पानी कर दिया है। मानसून की इस मेहरबानी के चलते आधे भोपाल की प्यास बुझाने वाला बड़ा तालाब फुल टैंक लेवल तक आ गया है। कहीं ओवरफ्लों ना हो जाए इसी आशंका को देखते हुए आज सुबह 8 बजे डेम के दो गेट खोल दिए गए। इस नजारे को देखने के लिए लोग सुबह से ही डैम के किनारे डट गए थे। डेम खोलने से पहले लोगों को सतर्क करने के लिए पहले सायरन बजाया गया और फिर जैसे ही गेट खुले लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और लोग वीडियों बनाने, फोटों खिंचने और सेल्फी लेने में जुट गए। पिछले दिनों हुई झमाझम के चलते बड़े तलाब का जलस्तर तेजी से बढ़ा और शुक्रवार देर रात ये 1666.80 फीट फुल टैंक लेबिल तक पहंुच गया था इसके बाद ही नगर निगम ने इसे आज खोलने का फैसला किया था। आपको बता दें कि एैसा दो साल बाद हुआ है जब बड़े तलाब का पेट पानी से लबालब हुआ है। जून में यह अपने डेड स्टोरेज लेबिल से भी नीचे चला गया था। और लोग ताकिया टापू पर पैदल ही जाने लगे थे।